हैदराबाद. आंध प्रदेश अमरावती क्षेत्र में रातोंरात अरबपति बने किसानों को अब लाखों गवाने की चिंता सताने लगी है। इससे बचने के लिए वहां के किसान अब ऐसे लोगों को ढूंढ रहे हैं जो उनकी अघोषित करोड़ों रुपये की सही जगह ठिकाने लगा दे और सही समय आने पर बिना पेनल्टी का नुकसान कराये वापस भी कर दे। विमुद्रीकरण का किसानों पर इतना बुरा असर है कि विजयवाड़ा, मंगलागिरी, थुल्लुर और गुंटूर के किसान संभावित नुकसान से निजात पाने के लिए बैंक अधिकारियों के इर्द-गिर्द चौबीसों घंटे घूमते नजर आने लगे हैं।
95 फीसद मामलों में कैश का कारोबार दो वर्ष पहले राज्य सरकार ने रजिस्ट्रेशन वैल्यू आठ लाख से 16 लाख तय किया था। एक अनुमान के अनुसार 95 फीसद मामलों में किसानों ने जमीन खरीदार से पैसा कैश में लिया। जबकि अधिकांश किसानों ने रातोंरात मिले इस पैसे से खेती के जमीन खरीदे, घर बनाया या लग्जरी कारें खरीद लीं। कुछ किसानों ने पैसों को लॉकर या सेफ जगह ठिकाने लगा दिया।कुछ भी करो पैसा बचा लो नुकसान विजयवाड़ा के रियए एस्टेट एजेंट बलराम रेडड्ी ने बताया कि जमीन बेचने की वजह से थुल्लुर, टाडेपल्ली और मंगलागिरी मंडल में किसानों के पास अचानक 5 से छह करोड़ रुपये के स्वामी बन बैठे। जो किसान उस समय रातोंरात करोड़पति बन गए वही अब बैंक का दिन भर चक्कर लगा रहे हैं। ताकि विमुद्रीकरण के बाद बड़े पैमाने पर संभावित नुकसान से बच सकें। अघोषित करोड़ों की संपत्ति को सही जगह ठिकाना लगा सकें। ऐसे किसान आज बैंक अधिकारियों से यह कहते हुए मिल जाते हैं कि कुछ भी करो मेरा पैसा बचा लो। यहां तक कि वे लोग रियल एस्टेट एजेंट से भी इस बात की गुहार लगा रहे हैं।मल्टीपल अकाउंट वाले किसान लकी मंगलागिरी एसबीआई ब्रांच के एक अधिकारी का कहना है कि कुछ किसान इस मायने लकी रहे, कि उन्होंने 2014 में अपने पैसे मल्टीपल बैंक अकाउंट में जमा किया। उनमें से अधिकांश के पास चार से पांच अकाउंट हैं। उन्हीं अकाउंटों में उन्होंने टुकड़ों में करोड़ रुपये जमा कराया।किसानों के फोन से परेशान हैं विधायक मंगलागिरी के विधायक रामकृष्ण रेड्डी का कहना है कि कुछ किसानों ने परेशानी से बचने के लिए एक ही अकाउंट में पैसा जमा किया तो कुछ ने शादी के लिए लॉकर में पैसों को बंद कर दिया। अब वही किसान नुकसान की संभावना ने परेशान हैं। वहीं रीयल एजेंट बीपीएल परिवार के लोगों को इस पैसे को खपाने के लिए यूज कर रहे हैं। ताकि सही समय आने पर उससे अपना पैसा वापस ले सकें।सताने लगा करोड़पति बनने डर दरअसल अक्टूबर 2013 से मार्च 15 के बीच अमरावती राजधानी क्षेत्र में काफी संख्या में किसानों ने जमीन बेचा। किसानों ने यह काम ये सोच कर किया कि अमरावती आंध्र प्रदेश की राजधानी बनने वाला है। यहां पर जमीन के दाम आसमान छूने लगेंगे। हुआ भी वैसा ही और किसानों ने 40 लाख प्रति हेक्टेयर की जमीन को एक करोड़ रुपये प्रति हैक्टेयर की दर से बेचा और अकूत पैसा जमा किया। ज्यादा ये ज्यादा पैसा कमाने के फेर में डेढ़ वर्षों से कुछ अधिक समय में वहां के किसानों 6,500 एकड़ जमीन बेच दिए और वे रातोंरात करोड़पति बन गए। अब वही पैसा खोने के डर से किसान लगा रहे हैं बैंक अधिकारियों और रीयल एस्टेट एजेंटों का चक्कर।
रातोंरात करोड़पति बने आंध्र के किसानों पर मंडरा रहा है खतरा
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